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Our History

श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामण्डल की स्थापना (Establishment of Brahmavart Sanatan Dharm Mahamandal)

सन्‌ 1910 में स्व० राय बहादुर देवी प्रसाद जी पूर्ण के सभापतित्व में उक्त महामण्डल की स्थापना हुई तथा समाजोपयोगी संस्कारक्षम शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतु सर्वप्रथम 1917 में सनातन धर्म विद्यालय (जिसे भवन विभाग के उपनाम से जाना जाता है) की आदि शिक्षा संस्था के रूप में स्थापना हुई | उक्त महामण्डल का कार्यभार परमात्मा की कृपा से प्रारम्भ में राय बहादुर बाबू विक्रमाजीत सिंह ने सम्भाला तत्पश्चात्‌ उनके सुयोग्य सुपुत्र प्रातः स्मरणीय बैरिस्टर नरेन्द्र बहादुर सिंह जैसे राष्ट्र चिन्तक के हाथ में आने पर महामण्डल ने प्रगति की आशातीत ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं।

इस समय महामण्डल के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्रजीत सिंह (सी.ए.) हैं जिनके मार्गदर्शन में आठ शिक्षा संस्थाएँ संचालित हैं | 

बालिका विद्यालय की स्थापना की आवश्यकता
(Need of establishment of a Girls’ Institution)

श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामण्डल द्वारा संचालित पं० दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय, बी.एन.एस.डी. इण्टर कालेज, बी०एन०एस०डी० शिक्षा निकेतन, बी०एन०एस०डी० शिक्षा निकेतन बालिका विद्यालय, सेठ मोती लाल खेड़िया सनातन धर्म इण्टर कालेज एवं श्री विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म महाविद्यालय उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु निरन्तर प्रयासरत हैं। इसी श्रृंखला में आजाद नगर कानपुर में दुर्गावती दुर्गाप्रसाद सनातन धर्म बालिका विद्यालय की स्थापना ज्येष्ठ कृष्णपक्ष द्वादशी सम्वत्‌ 2059 तद्नुसार दिनांक 7 जून 2002 ई० को की गयी। विद्यालय का शिलान्यास श्री ब्रह्मावर्त्त सनातन धर्म महामण्डल के तत्कालीन अध्यक्ष पं. राम बालक मिश्र द्वारा किया गया। उ.प्र. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से ‘ए’ श्रेणी प्राप्त इस विद्यालय में द्वादश कक्षा (कला व वाणिज्य) तक बालिकाओं हेतु शिक्षण सुविधा है। संस्था को महाविद्यालय तक उच्चीकृत किये जाने का संकल्प है।

दुर्गावती दुर्गाप्रसाद सनातन धर्म बालिका विद्यालय की स्थापना
(Establishment of Durgawati Durgaprasad Sanatan Dharm Balika Vidyalaya)

दुर्गावती दुर्गाप्रसाद सनातन धर्म बालिका विद्यालय की स्थापना का संकल्प आदरणीया दुर्गावती जी (बाई जी) ने लिया था। उनसे सम्बन्धित पृष्ठभूमि का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है :-

पूज्या दुर्गावती जी का विचार था कि किसी भी व्यक्ति की लौकिक तथा पारलौकिक प्रगति के लिए अच्छी शिक्षा तथा उस पर पड़ने वाले संस्कार अत्यन्त महत्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त किसी समाज तथा राष्ट्र को सही नेतृत्व तथा दिशा प्रदान करने के लिए मातृशक्ति का विकास उसी तरह आवश्यक है जैसे कि पुरुष वर्ग का। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उनके मन में एक ऐसे शिक्षा संस्थान की कल्पना को मूर्त रूप देने की इच्छा जीवन पर्यन्त रही जहाँ पर बालिकाओं को उत्तम पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त हो साथ ही साथ उनके मानस पटल पर भारतीय वैदिक सनातन संस्कारों की छाप भी पड़ सके।

वन्दनीय दम्पत्ति दुर्गावती एवं दुर्गाप्रसाद जी की पुण्य स्मृति में महामण्डल द्वारा किए गए इस शैक्षिक प्रयास से विद्यालय के वातावरण में उनकी स्मृति अन्तरिक्ष में संदीप्त मार्तण्ड की भाँति सदैव अमर रहेगी।