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सन्देश

सन्देश

बच्चों  तुम सभी जीवन में अपने लक्ष्य को अवश्य पाना चाहते होगे लेकिन चाहने से तो बात बनती नहीं, इसके लिए हमें निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता होती है तथा जीवन में कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

  • सबसे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी दिनचर्या पर ध्यान दें। हमारी दिनचर्या इसप्रकार की हो जिससे तन-मन दोनों स्वस्थ रहें। आज मैं तुम्हें तुम्हारी दिनचर्या के विषय में कुछ बताना चाहता हूँ:-
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  • तुम्हें प्रातःकाल जल्दी उठना चाहिए परन्तु इसके लिए आवश्यक है कि तुम रात में जल्दी सो जाओ। प्रातःकाल का समय अध्ययन सहित अनेक कार्यों को करने का सबसे अधिक उपयुक्त समय है। तुमने अवश्य सुना होगा –                                                                                                                                                                                                                                                                                ‘‘जो रात में जल्दी सोये और सुबह को जल्दी जागे
                                                                             उस बच्चे से दूर-दूर दुनिया का गम भागे’’
  • प्रातःकाल कुछ समय प्राणायाम, योग व व्यायाम करो। इससे दिन भर तुम्हें स्फूर्ति मिलेगी साथ ही तुम्हारी सकारात्मक सोच विकसित होगी। इस तरह तुम्हारी अनेक बुराइयाँ स्वयं दूर हो जायेंगी।
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  • नाश्ते व खाने में तुम लोग पौष्टिक पदार्थ लो। इसके लिए बहुत महंगे खाद्य पदार्थ लेने की आवश्यकता नहीं है। अंकुरित अनाज, लइया-चना, सत्तू, मौसम का फल तुम ले सकते हो। मैदा से बने खाद्य पदार्थ – नूडल, मोमो, पीजा, बर्गर मत खाओ। ये हानिकारक हैं।
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  •  प्रेरक साहित्य पढ़ो जैसे – महापुरुषों, देशभक्तों की जीवनियाँ, अच्छी कहानियाँ, लोक कथाएँ आदि।
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  • परिवार के सदस्यों से अवश्य बात-चीत करो। घर के बुजुर्गों से उनके समय की घटनाओं के विषय में जानो। इनकी बातें तुम्हें पुस्तकों में लिखी बातों से अधिक अच्छी लगेंगी। इण्टरनेट, मोबाइल और कम्प्यूटर का सीमित प्रयोग करो।
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  • प्रतिदिन खेलना तुम्हारे लिए अनिवार्य है। इससे तुम्हारा मन प्रसन्न रहेगा और तुम्हें पुनः कार्य और अध्ययन करने के लिए ऊर्जा प्राप्त होगी |
  • बच्चों, हमेशा ध्यान रखना कि तुममं केवल अच्छी आदतें ही बने क्योंकि आदतों का बनना जितना कठिन है उससे भी अधिक मुश्किल है किसी गलत आदत से छुटकारा पाना  |
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  • हमेशा स्वयं पर निगाह रखो जिससे जो मार्ग तुम चुनो वह तुम्हारे व देश के लिए कल्याणकारी हो।
  • आजकल बच्चों में क्रोध बहुत अधिक बढ़ता जा रहा है। मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि क्रोध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि ये समस्या को और बढ़ा देता है। सबसे बड़ी बात है कि निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प से हम क्रोध पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। तुम्हें याद रखना होगा कि जब हम क्रोध करते हैं तो हम दूसरे की गलती की सजा स्वयं को देते हैं।
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  •  बच्चों, अतिथि को देवता स्वरूप माना जाता है इसलिए मैं तुमसे कहना चाहता हूँ कि हमेशा घर पर आने वाले अतिथिगण का उचित सम्मान करो। उनका प्रसन्न्तापूर्वक अभिवादन करके बिठाना, स्वागत और आतिथ्य करना तुम्हारा कर्तव्य है।
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  •  मैं चाहता हूँ कि तुम लोग प्रतिदिन डायरी लिखा करो। यदि डायरी न हो तो एक काॅपी बना लो। रात को डायरी में पूरे दिन के घटनाक्रम को लिखो। अगर तुमने किसी के साथ गलत व्यवहार किया है तो दूसरे दिन अपनी गलती स्वीकार कर लो और भविष्य में इसे मत दोहराओ।
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  • रात में सोते समय और सुबह उठते ही ईश्वर को धन्यवाद अवश्य दो कि उनकी कृपा से तुम्हें सर्वश्रेष्ठ योनि – मानव योनि में जन्म मिला है।
    बच्चों , अगर तुम मन से चाहो तो इन सब बातों का पालन जीवन में कर सकते हो तथा राष्ट्र के योग्य, सदाचारी, सफल और स्वावलम्बी नागरिक बन सकते हो। ऐसा करना कठिन है परन्तु असंभव नहीं।