सन्देश

आदित्य शंकर बाजपेयी
अध्यक्ष
दुर्गावती दुर्गाप्रसाद सनातन धर्म बालिका विद्यालय में नारी शक्ति को समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराने तथा नारी का सशक्तीकरण करने का पवित्र व राष्ट्रहित का कार्य गत बीस वर्षों से अनवरत चल रहा है। भारतीय सनातन संस्कृति तथा मानव मूल्यों एवं संस्कारयुक्त शिक्षा से बालिकाओं को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी रखना हमारा हमारा लक्ष्य है। बालिकाओं के सर्वांगीण विकास हेतु तत्पर विद्यालय परिवार – प्रबन्धतंत्र, आचार्या वर्ग, शिक्षणेतर कर्मचारी सभी अपनी-अपनी भूमिका का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं। ईश्वरीय आशीष से हमारी छात्राएँ इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करके न केवल अपने निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति की ओर आगे बढ़ रही हैं बल्कि अपने स्वप्नों को भी साकार कर रही हैं। इस पवित्र कार्य में हमें समाज का भी अमूल्य सहयोग प्राप्त हो रहा है। मेरी हार्दिक कामना है कि प्रखर राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण इस विद्यालय की छात्रायें राष्ट्र हेतु सर्वस्व समर्पण कर अहर्निश राष्ट्र हित में कार्य करती रहें।

सरस्वती अग्रवाल
मंत्री
महान देशभक्त, चिन्तक, दार्शनिक व शिक्षाशास्त्री स्वामी विवेकानन्द ने कहा है-“मनुष्य की अंतर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना शिक्षा है। (Education is the manifestation of perfection already present in man.) मनुष्य पूर्ण है क्योंकि उसकी रचना उस परमेश्वर ने की है जो स्वयं सम्पूर्ण है। पूर्णता की ओर अग्रसर होने की ये यात्रा आजीवन चलती रहती है, कहीं नहीं रूकती। संभवत: यही कारण है कि शिक्षा को भी आजीवन चलने वाली ऐसी प्रक्रिया माना गया है जिससे व्यक्ति स्वयं में निहित गुणों को खोजने और विकसित करने में सक्षम बनता है। भगवद्गीता का उद्घोष है कि प्रत्येक व्यक्ति में दिव्यता का अंश जन्मजात रूप से ही विद्यमान होता है। ये दिव्यता ईश्वरीय अंश होने के कारण व्यक्ति की ऐसी विशिष्टता है जो उसे अन्य व्यक्तियों से भिन्न पहचान देती है। व्यक्ति में निहित इस दिव्यता को विकसित करने का प्रयास किया जाये तो व्यक्ति मात्र ‘व्यक्ति’ न रहकर ‘व्यक्तित्व’ बन जाता है। दिव्यता के विकास में स्वयं व्यक्ति के साथ-साथ परिवार, समाज और विद्यालय की अहम भूमिका को संज्ञान में लेते हुए हमारा प्रयास रहता है कि सीमित संसाधनों में छात्राओं को उनकी विशिष्टता के विकास हेतु उपयुक्त अवसर प्रदान किये जाएँ। हमारा विश्वास है कि जिसप्रकार मिट्टी, वायु, जल, प्रकाश, खाद आदि पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होने पर ही नन्हा सा बीज वटवृक्ष के रूप में विकसित होता है उसीप्रकार हमारा प्रयास है कि हम बालिकाओं को उनके लक्ष्य की प्राप्ति हेतु हर संभव मार्गदर्शन, सहायता, सुविधा उपलब्ध कराएँ जिससे वे अपने सपने को साकार कर सकें, ऊँची उड़ान भर सकें। छात्राओं में अंतर्निहित सद्प्रवृत्तियों और उदात्त गुणों को मुखर करना हमारा उद्देश्य है। हमारी बालिकाएँ विवेक और सद्बुद्धि से युक्त होकर अपने राष्ट्र की उत्तरदायी नागरिक बनें, बालिकाओं के संस्कार ही उनकी पहचान हों- यही हमारी कामना है अत: पाठ्यक्रम के साथ-साथ पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं का संचालन इसप्रकार करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं कि हमारी बालिकाएँ सशक्त, आत्मनिर्भर, संकल्पवान व आत्मविश्वासी बनें। यह मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक सत्य है कि प्रत्येक व्यक्ति में सृजनात्मक व विध्वंसात्मक दोनों प्रकार की प्रवृत्तियां निहित होती हैं। शिक्षा का कार्य सृजनात्मक वृत्तियों का विकास तथा विध्वंसात्मक वृत्तियों का सकारात्मक रूपांतरण करना है अत: हमारा प्रयास है कि हम अपनी बालिकाओं की ‘जिद्द’ को उनके ‘दृढ संकल्प’ में तथा ‘क्रोध’ को ‘न्यायप्रियता’ में रूपान्तरित करने का यज्ञीय कार्य निरंतर करते रहें। इस विद्यालय की स्थापना से जुड़े सभी सदाशय महानुभावों के आशीष से हमारी छात्राएँ प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी रहें और हम उनकी आकांक्षा के अनुकूल बालिकाओं के निर्माण में अहर्निश समर्पित रहें- इसी कामना के साथ हमारा संकल्प है ‘ये उथल-पुथल उत्ताल लहर पथ से न डिगाने पायेगी, पतवार चलाते जायेंगे मंजिल आएगी-आएगी।’

श्रीमती नम्रता सिंह
प्रधानाचार्या
हमारा उद्देश्य छात्राओं को मात्र विषयगत ज्ञान देना ही नहीं अपितु उनके सर्वांगीण विकास हेतु अनेक गतिविधियों का संचालन करना भी है। विभिन्न कौशलों के विकास हेतु हमारी छात्राएँ अनेक प्रतियोगिताओं में भाग लेती हैं और अपनी प्रतिभा को निखारती हैं। मुझे विश्वास है कि हमारी छात्राएँ आगे चलकर प्रखर देशभक्त एवं विभिन्न कौशलों से परिपूर्ण सभ्य नागरिक बनेंगी। वे समाज और देश के विकास में सक्रिय योगदान देकर अपने जीवन को सफल बनायेंगी, ऐसी मुझे आशा है।
